चारधाम यात्रा के पहले महीने में 53 लोगों की मौत, 15 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु तीर्थस्थल पहुंचे
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उत्तराखंड में जारी चारधाम यात्रा के शुरुआती महीने में 50 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक़, ज़्यादातर मौतें दुर्घटनाओं के कारण नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं- जैसे दिल का दौरा, ऊंचाई पर होने वाली बीमारी, उच्च रक्तचाप और खराब मौसम के संपर्क में आने के कारण हुई हैं. न्यू इंडिया एक्सप्रेस ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया है कि पिछले महीने 19 अप्रैल को शुरू हुई चारधाम यात्रा के दौरान अब तक 50 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटा के अनुसार इस दौरान 15.63 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्रियों ने चारों धामों के दर्शन किए हैं और 53 लोगों की मौत की सूचना मिली है. कुल 53 मौतों में से 28 मौतें केदारनाथ में दर्ज की गई हैं. इसके बाद बद्रीनाथ में 10, यमुनोत्री में आठ और गंगोत्री में सात मौतें हुई हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, ज़्यादातर मौतें दुर्घटनाओं के कारण नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं- जैसे दिल का दौरा, ऊंचाई पर होने वाली बीमारी, उच्च रक्तचाप और खराब मौसम के संपर्क में आने के कारण हुई हैं. उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में इस तीर्थयात्रा में मृत्यु दर काफी ज़्यादा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में यात्रा के दौरान 246 तीर्थयात्रियों की मृत्यु हुई, जबकि 2025 के सीज़न में 83 लोगों की मौत की सूचना मिली. ज्ञात हो कि इस तीर्थयात्रा के रास्ते ऊंचे पहाड़ी इलाकों से होकर गुज़रते हैं, जहां ऑक्सीजन का स्तर कम होता है और चढ़ाई भी काफ़ी खड़ी होती है; इससे बुज़ुर्ग तीर्थयात्रियों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य को ख़तरा हो सकता है. इस संबंध में उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि कई तीर्थयात्री अपनी यात्रा पूरी करने की कोशिश में शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिससे दिल से जुड़ी समस्याएं और ऊंचाई पर होने वाली बीमारियां और भी बिगड़ सकती हैं. सुबोध उनियाल ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सहायता बढ़ा दी है. मंत्री ने आगे कहा, ‘हमने यात्रा मार्ग पर 47 अस्पताल स्थापित किए हैं और विभिन्न पड़ावों पर लगभग 2,820 स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ 400 डॉक्टरों को भी तैनात किया है.’ सरकार ने दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के 180 डॉक्टरों को ऊंचाई पर होने वाली बीमारी, उच्च रक्तचाप और डायबिटीज़ से जुड़ी दिक्कतों का इलाज करने के लिए ट्रेनिंग भी दी है. वहीं, केदारनाथ और बद्रीनाथ में अस्पताल की और भी सुविधाएं बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर्स को अपग्रेड किया जा रहा है, जबकि ‘गोल्डन आवर’ के दौरान इमरजेंसी रिस्पॉन्स को बेहतर बनाने के लिए कौड़ियाला जैसी जगहों पर नए सेंटर बनाने की योजना है. अधिकारियों ने दिल की बीमारी या उच्च रक्तचाप से पीड़ित तीर्थयात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले मेडिकल जांच करवाने की सलाह दी है. साभार दा वायर
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