राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को लोक कार्य के क्षेत्र में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया।
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कोश्यारी ने विषम हालात में भी पढ़ाई पर दिया जोर उपलब्धियों भरा है भगत दा का जीवन बागेश्वर। सोमवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मभूषण सम्मान प्रदान किया। बहुमुखी प्रतिभा के धनी कोश्यारी का पूरा जीवन उपलब्धियों भरा रहा है। सामान्य परिवार में जन्मे कोश्यारी ने राजनीति में शून्य से शिखर तक का सफर तय किया। कुशल शिक्षक और पत्रकार के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उनको पुरस्कार मिलने पर गांव खेमिला, नामतीचेटाबगड़ में खुशी की लहर है। विगत 25 जनवरी को पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी को पद्मभूषण दिए जाने की घोषणा हुई थी। कोश्यारी का जन्म कपकोट के दूरस्थ खेमिला, नामतीचेटाबगड़ में गोपाल गांव सिंह कोश्यारी और मोतिमा देवी के घर 17 को हुआ था। परिवार की माली हालत बेहतर नहीं होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा ग्रहण करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय महरगाड़ी से हासिल की। शामा से हाईस्कूल और कपकोट से इंटरमीडिएट किया। आगे की शिक्षा उन्होंने अल्मोड़ा से हासिल की। 1961 में वह अल्मोड़ा कॉलेज में छात्रसंघ महासचिव चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 1975 में लगाए गए आपात काल के विरोध के चलते उन्हें करीब पौने दो साल तक जेल में रहना पड़ा।23 मार्च, 1977 को रिहा होने के बाद उन्हें राजनीतिक तौर पर पहचान मिलने लगी। उन्होंने 1979 से 1985 और 1988 से 1991 तक वह कुमाऊं विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल में प्रतिनिधित्व किया।
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