ऑटिज्म:अक्षमता नहीं एक अद्वितीय क्षमता सहानुभूति नहीं, स्वीकार्यता का संकल्प
Dainik Today Khabaren0
रामनगर : (नैनीताल ) विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (2 अप्रैल) के अवसर परसंदेशसादर नमस्कार, मैं एक 'अर्ली इन्टर्वेंशनिस्ट सह विशेष शिक्षक' के रूप में अपने 15 वर्षों के संचित अनुभवों और भावनाओं को आज इस पावन अवसर पर आप सभी के सम्मुख रख रहा हूँ। मेरा यह अटूट विश्वास है कि समाज को अब 'रोग', 'विकार' और 'छिपी हुई अक्षमता' के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझना होगा। ऑटिज्म कोई संक्रामक बीमारी नहीं है जिसे दवाओं से जड़ से मिटाया जा सके, बल्कि यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली की एक 'विशेष अवस्था' है। आज के दौर में यह बड़ी विडंबना है कि थैरेपी के नाम पर कई अभिभावकों को भ्रामक दावों से गुमराह किया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे को केवल मशीनी उपचार की नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। किसी भी सफल हस्तक्षेप की पहली सीढ़ी बच्चे के 'बैठने की क्षमता' को विकसित करना है, क्योंकि जब तक बच्चा स्थिर होकर बैठना नहीं सीखेगा, उसका मस्तिष्क सीखने के लिए तैयार नहीं होगा। इसके पश्चात, हमें उसकी 'ग्रहणशील भाषा' और सूचना को समझने की गति पर विशेष बल देना चाहिए। जब बच्चा निर्देशों को समझना शुरू कर देता है, तो उसकी अभिव्यक्ति का मार्ग स्वयं प्रशस्त हो जाता है। अपने अनुभव के आधार पर, अभिभावकों के लिए जीवन के इस संघर्ष को सुगम बनाने हेतु मैं कुछ अनिवार्य दिशा-निर्देश साझा करना चाहता हूँ। क्या करना चाहिए:
सबसे पहले अपने बच्चे की विशिष्टता को स्वीकार करें और उसकी तुलना किसी अन्य सामान्य बच्चे से करना छोड़ दें। बच्चे के लिए एक निश्चित और समझने योग्य दिनचर्या बनाएं, जिससे उसे पता हो कि अगले पल क्या होने वाला है; इससे उसकी घबराहट कम होगी। संवाद के लिए चित्रों या संकेतों जैसे वैकल्पिक तरीकों का प्रयोग करें और उसकी हर छोटी सफलता पर उसकी भरपूर सराहना करें। क्या नहीं करना चाहिए: बच्चे के व्यवहार को 'शरारत' या 'ज़िद' समझकर कभी भी उसे शारीरिक दंड न दें, क्योंकि उसका व्यवहार उसकी आंतरिक असहजता का संकेत होता है। बच्चे को मोबाइल, टैबलेट या टीवी के भरोसे कभी अकेला न छोड़ें, क्योंकि इससे उसका सामाजिक अलगाव और बढ़ जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी प्रकार के अंधविश्वास, झाड़-फूंक या 'चमत्कारी इलाज' के भ्रामक दावों के जाल में न फंसें। ऑटिज्म में केवल समय पर दी गई सही थैरेपी और आपका धैर्य ही कारगर सिद्ध होता है। समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से भी मेरी एक विनम्र अपील है। ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे हमारे समाज का अभिन्न अंग हैं। अक्सर जानकारी के अभाव में हम सार्वजनिक स्थानों पर इन बच्चों के व्यवहार को 'अनुशासनहीनता' समझ लेते हैं, जबकि वे संवेदी कोलाहल से जूझ रहे होते हैं। ऐसे समय में उनके माता-पिता को उपेक्षा या आलोचना की दृष्टि से देखने के बजाय, उन्हें आपके सहयोग और स्वीकार्यता की आवश्यकता होती है। यदि हम उन्हें सही दिशा और सकारात्मक परिवेश प्रदान करें, तो ये बच्चे न केवल नई चीजें सीख सकते हैं, बल्कि समाज में एक आत्मनिर्भर और सम्मानित जीवन भी व्यतीत कर सकते हैं। एक समाज और परिवार के रूप में हमारा मुख्य कार्य बच्चे को 'बदलना' नहीं, बल्कि उसके लिए एक 'बहुमुखी विकासात्मक वातावरण' का निर्माण करना है। इसे एक पौधे के उदाहरण से समझिए, एक माली का काम बीज को बड़ा करना नहीं होता, बल्कि उसे सही मिट्टी, खाद और अनुकूल वातावरण देना होता है; पौधा तो अपनी प्राकृतिक शक्ति से स्वयं खिलता है। ठीक उसी तरह, यदि हम इन बच्चों को एक सकारात्मक, सुरक्षित और स्वीकार्य परिवेश दे सकें, तो ये बच्चे स्वयं अपनी गति से पल्लवित और पुष्पित होंगे। हमारी भूमिका केवल एक 'सजग प्रेक्षक' और मार्गदर्शक की होनी चाहिए। आइए, आज हम संकल्प लें कि हम इनके पंखों को काटेंगे नहीं, बल्कि इन्हें अपनी क्षमताओं के खुले आसमान में उड़ने का हौसला देंगे। हम इस सफर में आपके साथ हैं। ऑटिज्म से संबंधित किसी भी प्रकार के प्रारंभिक हस्तक्षेप, स्पीच थेरेपी, फिजियोथेरेपी, ऑप्टोमेट्री, विशेष शिक्षा, विशेषज्ञ मेडिकल परामर्श आदि हेतु ऑफलाइन एंड ऑनलाइन निःशुल्क आप 'जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र' (DEIC), बेस एवं महिला चिकित्सालय, हल्द्वानी (नैनीताल) में निसंकोच संपर्क कर सकते हैं। हमारी पूरी टीम इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य हेतु पूर्णतः समर्पित है। विशेष बच्चे सहानुभूति के मोहताज नहीं हैं; ये कुदरत के वो अनमोल मोती हैं जिन्हें तराशने के लिए केवल तकनीक की नहीं, बल्कि असीम धैर्य और करुणा की आवश्यकता होती है। आइये! मिलकर एक समावेशी समाज निर्माण में सहयोग करें। धन्यवाद दिनेश मठपाल (अर्ली इन्टर्वेंशनिस्ट सह विशेष शिक्षक) पंजीकरण संख्या (RCI): A13129 ईमेल: dkmathpal@gmail.com संपर्क: +91 9639582605
Post a Comment